जबलपुर। मध्य प्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी के तत्वावधान में संस्कारधानी जबलपुर में संचालित सभी विद्युत कंपनियों की महिला अधिकारी-कर्मचारियों को सशक्त और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से एक अनूठा प्रयास किया गया है। 'नारी शक्ति वंदन' अभियान के अंतर्गत आज कल्याण भवन में महिलाओं के लिए आत्मरक्षा, व्यक्तिगत सुरक्षा और बचाव को लेकर एक विशेष प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में मुंबई पुलिस के पूर्व ट्रेनर राजेंद्रन नायर ने बिजली कंपनियों की लगभग 100 महिला कर्मचारियों को बिना किसी हथियार के मुकाबला करने (सेल्फ डिफेंस) और होलिस्टिक वर्कआउट की बारीकियों से रूबरू कराया। वर्तमान में पावर एक्सचेंज ऑफ इंडिया (PXIL) में सलाहकार के रूप में कार्यरत नायर ने मध्य प्रदेश में पहली बार महिलाओं के लिए इस तरह का विशेष सत्र संचालित किया है।

महिला सशक्तिकरण के लिए सुरक्षा और निर्भीकता अनिवार्य

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी के कार्यपालक निदेशक (मानव संसाधन एवं प्रशासन) फिरोज कुमार मेश्राम ने महिला सशक्तिकरण के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि समाज में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए सबसे बुनियादी और जरूरी तत्व उनकी आंतरिक सुरक्षा और निर्भीकता की भावना है। कार्यपालक निदेशक ने जोर देकर कहा कि इस तरह के व्यावहारिक प्रशिक्षण शिविरों के नियमित आयोजन से महिला कर्मियों के भीतर आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे कार्यस्थल से लेकर समाज में हर जगह निडर होकर अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकेंगी।

रोजमर्रा की चीजों से बचाव और विपरीत परिस्थितियों से निकलने की मिली ट्रेनिंग

विशेषज्ञ ट्रेनर राजेंद्रन नायर ने शिविर में मौजूद महिलाओं को संकट के समय खुद को सुरक्षित रखने के कई सैद्धांतिक और व्यावहारिक तरीके सिखाए। प्रशिक्षण के दौरान महिला कर्मचारियों को मुख्य रूप से निम्नलिखित बातें सिखाई गईं:

  • आस-पास के माहौल को भांपकर खतरे के संकेतों के प्रति हमेशा सतर्क रहना।

  • किसी भी अवांछित परिस्थिति में अपनी बात को दृढ़ता और मजबूती से सामने रखना।

  • यदि कोई अचानक हमला कर दे, हाथ पकड़ ले या गला दबाने की कोशिश करे, तो बिना डरे उसकी गिरफ्त से खुद को छुड़ाना।

  • सड़क चलते होने वाले उत्पीड़न या आकस्मिक हमलों से अपना बचाव करना और आत्मरक्षा के लिए पर्स, चाबी या पेन जैसी रोजमर्रा की चीजों का हथियार के रूप में इस्तेमाल करना।

'गति में ध्यान' यानी प्राचीन चीनी मार्शल आर्ट 'ताई-ची' से हुआ परिचय

इस प्रशिक्षण शिविर का एक और मुख्य आकर्षण प्राचीन चीनी मार्शल आर्ट 'ताई-ची' का सत्र रहा। ट्रेनर ने महिला कर्मियों को इस कला का विशेष अभ्यास कराया, जो अपनी धीमी, पूरी तरह नियंत्रित और ध्यानमग्न शारीरिक गतिविधियों के लिए दुनिया भर में मशहूर है। स्वास्थ्य और मानसिक एकाग्रता के लिए बेहद फायदेमंद इस कला को 'गति में ध्यान' (मेडिटेशन इन मोशन) भी कहा जाता है। इस शारीरिक और मानसिक कसरत के जरिए महिलाओं को तनाव मुक्त रहने और विपरीत परिस्थितियों में भी शांत दिमाग से फैसले लेने का तरीका सिखाया गया।