मऊगंज सिविल अस्पताल की हकीकत आई सामने, इलाज व्यवस्था सवालों में
मऊगंज| मऊगंज जिला अस्पताल से चिकित्सा जगत को झकझोर देने वाली एक बेहद संगीन और चौंकाने वाली जमीनी हकीकत सामने आई है। अस्पताल परिसर के भीतर जब लाचार और बीमार लोगों की भारी भीड़ इलाज की आस में तड़प रही थी, तब वहां तैनात चिकित्सक अपनी सीटों से नदारद थे। हद तो तब पार हो गई जब डॉक्टरों द्वारा रखे गए निजी सहायक मेजों पर कब्जा जमाकर मरीजों का पर्चा और दवाइयां लिख रहे थे। वहीं दूसरी तरफ, चिकित्सालय में साफ-सफाई और चादरें बदलने की जिम्मेदारी संभालने वाले आउटसोर्स (मल्टी स्किल्ड ग्रुप-डी) के सफाईकर्मी सरेआम गंभीर मरीजों को सुई (इंजेक्शन) ठोकते हुए कैमरे में कैद हुए हैं।
स्थानीय निवासियों का सीधा आरोप है कि सरकारी वेतन उठाने वाले ये डॉक्टर अस्पताल की ड्यूटी को दरकिनार कर अपने निजी क्लीनिक चमकाने में मशगूल हैं, जिसके कारण पूरा अस्पताल रामभरोसे चल रहा है। ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) प्रद्युम्न शुक्ला के नाक के नीचे बदइंतजामी का आलम यह है कि अस्पताल के वार्डों में एक-एक बिस्तर पर दो-दो मरीजों को जबरन लेटाकर उनका इलाज किया जा रहा है, जो प्रशासनिक विफलता की पराकाष्ठा है।
चिलचिलाती धूप में बेदम हुआ अस्पताल प्रशासन, राजधानी से दौड़े उपनिदेशक
इस घोर लापरवाही का एक वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैलने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। मामले को गंभीर भांपते हुए राजधानी भोपाल से स्वास्थ्य विभाग के उपनिदेशक लालप्रणय सिंह खुद जमीनी हकीकत परखने औचक निरीक्षण पर पहुंचे। हालांकि, उनके सामने ही वहां मौजूद पीड़ितों और उनके तीमारदारों ने अस्पताल प्रशासन के दावों के परखच्चे उड़ा दिए। भीषण तपिश के बीच अस्पताल में बीमारों के लिए एक अदद स्ट्रेचर तक उपलब्ध नहीं था, जिसके चलते मजबूर परिजन अपने बीमार अपनों को गोद और कंधों पर लादकर ले जाने को विवश दिखे। वहीं दूसरी ओर, ओपीडी में डॉक्टरों के कमरे वीरान पड़े धूल फांक रहे थे।
पीड़ितों का फूटा दर्द, अस्पताल में टिटनेस की दवा तक नदारद
जांच अधिकारी के सामने परिजनों ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई। लोगों ने बताया कि इस तथाकथित जिला स्तरीय चिकित्सालय में एक अदद टिटनेस का इंजेक्शन तक नसीब नहीं होता, मरीजों को सब कुछ बाहर की दुकानों से महंगे दामों पर खरीदना पड़ता है। डॉक्टर कभी भी नियत समय पर अपनी कुर्सी पर नहीं बैठते और असहाय मरीजों को इलाज के लिए घंटों तड़पना पड़ता है। जब जांच टीम ने प्रशासनिक अफसरों से गायब स्ट्रेचरों पर जवाब तलब किया, तो उन्होंने हमेशा की तरह कागजों पर सब कुछ दुरुस्त होने का दावा ठोक दिया, जबकि धरातल पर तीमारदार अपनों को पीठ पर लादकर भटक रहे थे।
सफाईकर्मियों के हाथों में थमा दी सिरिंज, दर्द से तड़पे बुजुर्ग
सामने आए वीडियो में यह साफ देखा जा सकता है कि अस्पताल के डॉक्टर अवनीश सिंह का एक निजी सहायक खुद डॉक्टर की भूमिका में आकर धड़ल्ले से पर्चे पर दवाइयां लिख रहा है। दूसरी ओर, चतुर्थ श्रेणी के सफाई कर्मचारी मरीजों को दवाइयां बांटने के साथ-साथ गंभीर रूप से बीमार लोगों को सुई लगा रहे हैं। एक फुटेज में एक बुजुर्ग मरीज को सामान्य कुर्सी पर बैठाकर आउटसोर्स कर्मी सुई लगाता दिख रहा है, और अप्रशिक्षित होने के कारण वह बुजुर्ग के जिस्म में बार-बार सुई चुभा रहा है, जिससे बेबस बुजुर्ग दर्द के मारे चीख उठे।
जिंदगी के साथ सरेआम खिलवाड़, व्यवस्था पर दागे तीखे सवाल
अस्पताल के भीतर चल रही इस जानलेवा लापरवाही को लेकर आम जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है। परिजनों का साफ कहना है कि योग्य और डिग्रीधारी मेडिकल स्टाफ की जगह अनपढ़ और नौसिखिए सफाईकर्मियों से इंजेक्शन लगवाना सीधे तौर पर इंसानी जिंदगी को मौत के मुंह में धकेलने जैसा है। ऐसे में यह यक्ष प्रश्न खड़ा होता है कि आखिर ड्यूटी के वक्त जिम्मेदार डॉक्टर और सरकारी नर्सें कहां लापता थीं? अगर वे ईमानदारी से अपना फर्ज निभा रहे होते, तो किसी बाहरी लड़के या सफाईकर्मी की यह मजाल कैसे होती कि वह मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर सके?
कागजी खानापूर्ति नहीं, सीधे कड़ी कार्रवाई की मांग
सिविल अस्पताल का यह खौफनाक मंजर सरकार के चमचमाते स्वास्थ्य दावों की कलई खोलकर रख देता है। फिलहाल भोपाल से आई विशेष टीम की जांच रिपोर्ट और प्रशासन के अगले कदम का इंतजार किया जा रहा है। हालांकि, स्थानीय जनता का कहना है कि हर बार ऐसे गंभीर मामलों में सिर्फ कागजी औपचारिकताएं पूरी करके फाइल बंद कर दी जाती है, यही वजह है कि मऊगंज अस्पताल में बेखौफ होकर जनता की सांसों का सौदा करने का यह खतरनाक खेल लंबे समय से बदस्तूर जारी है।
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