राहुल गांधी का विवादित बयान, बोले- अडाणी की रिहाई के लिए हुआ समझौता
नई दिल्ली: अमरीका में प्रख्यात भारतीय उद्योगपति गौतम अडाणी से जुड़े कथित रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के मामले में आए एक बड़े मोड़ के बाद देश की सियासत एक बार फिर पूरी तरह गरमा गई है। 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' की एक खोजी रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि अमरीकी न्याय विभाग अडाणी समूह के खिलाफ दर्ज आपराधिक आरोपों को वापस लेने की संभावनाओं पर विचार कर रहा है। इस अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के सार्वजनिक होते ही प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विपक्ष का आरोप है कि भारत और अमरीका के बीच हाल ही में हुए व्यापारिक व कूटनीतिक समझौतों का वास्तविक मकसद राष्ट्रीय हित नहीं, बल्कि अडाणी समूह को अमरीकी कानूनी फंदे से राहत दिलाना था।
राहुल गांधी का तीखा हमला और 'सौदेबाजी' के आरोप
इस पूरे घटनाक्रम पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधे घेरा है। उन्होंने केंद्र सरकार पर तीखा तंज कसते हुए लिखा कि देश के 'कॉम्प्रोमाइज्ड' प्रधानमंत्री ने अमरीका के साथ कोई व्यापारिक समझौता नहीं किया है, बल्कि अडाणी की रिहाई का सीधा सौदा किया है। राहुल गांधी और पूरी कांग्रेस पार्टी पहले भी कई मौकों पर सरकार पर गौतम अडाणी को अनुचित राजनैतिक संरक्षण देने के गंभीर आरोप लगाती रही है। विपक्ष का तर्क है कि अमरीकी जांच एजेंसियों द्वारा लगाए गए आरोप बेहद संगीन थे, और अब यदि इस मामले को अचानक ठंडा या कमजोर किया जा रहा है, तो इसके पीछे निश्चित रूप से भारी राजनैतिक व आर्थिक दबाव काम कर रहा है।
अमरीकी राष्ट्रपति के करीबी वकील और 10 अरब डॉलर का दांव
'द न्यूयॉर्क टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कानूनी संकट से उबरने के लिए गौतम अडाणी ने अमरीका में एक बेहद रसूखदार और नई कानूनी टीम को मैदान में उतारा है। इस टीम की कमान रॉबर्ट जे. गिफ्रा जूनियर के हाथों में है, जिन्हें अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का निजी वकील भी माना जाता है। इस कद्दावर कानूनी टीम ने अमरीकी अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठकें कर यह दलील दी है कि अभियोजन पक्ष के पास अडाणी के खिलाफ न तो पर्याप्त सबूत हैं और न ही यह मामला उनके अधिकार क्षेत्र में आता है। इसके साथ ही रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि अडाणी समूह ने अमरीका में करीब 10 अरब डॉलर के भारी-भरकम निवेश और हजारों नई नौकरियां पैदा करने का संकेत दिया है। हालांकि, अमरीकी अधिकारियों ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि इस निवेश प्रस्ताव का कानूनी केस की निष्पक्षता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
जयराम रमेश के सवाल और सिविल मुकदमे में भारी-भरकम समझौता
इस मुद्दे पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद जयराम रमेश ने भी सरकार को आड़े हाथों लेते हुए भारत-अमरीका व्यापार समझौते को पूरी तरह एकतरफा और देश के हितों के खिलाफ बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने अमरीकी प्रशासन के सामने घुटने टेक दिए हैं और 'ऑपरेशन सिंदूर' को अचानक रोकना व अडाणी मामले में दिख रही नरमी इसी साठगांठ का हिस्सा है। इसी बीच अंतरराष्ट्रीय मीडिया से यह भी खबरें आ रही हैं कि अमरीकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (SEC) ने गौतम अडाणी और सागर अडाणी के साथ चल रहे एक सिविल मुकदमे में आपसी समझौता कर लिया है। इसके तहत गौतम अडाणी 6 मिलियन डॉलर और सागर अडाणी 12 मिलियन डॉलर का नागरिक जुर्माना भरने को तैयार हो गए हैं, हालांकि इस कानूनी समझौते के तहत उन्होंने अपनी तरफ से किसी भी प्रकार के दोष या अपराध को स्वीकार नहीं किया है।
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