विजयेंद्र के खिलाफ मोर्चा खुलने से कर्नाटक BJP में सियासी घमासान
बेंगलुरु: कभी दक्षिण भारत में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए सत्ता और संभावनाओं का मुख्य प्रवेश द्वार रहा कर्नाटक अब केंद्रीय नेतृत्व के लिए एक बड़ी राजनीतिक सिरदर्दी बन गया है। दो साल बाद होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटने के बजाय, सूबे में पार्टी अंदरूनी कलह, खुली बगावत और कई धड़ों में बंटी नजर आ रही है। हाल ही में संपन्न हुए विधान परिषद चुनाव में पार्टी के भीतर हुई 'क्रॉस वोटिंग' (दलबदल मतदान) ने इस सुलगती आग में घी का काम किया है। इसके बाद से ही पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा का परिवार विरोधी गुटों के सीधे निशाने पर है और विभिन्न खेमे एक-दूसरे पर सार्वजनिक रूप से तीखे तीर चला रहे हैं। इस अंदरूनी उठापटक के चलते केंद्रीय आलाकमान न तो नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर कोई अंतिम फैसला ले पा रहा है और न ही क्रॉस वोटिंग करने वाले बागी विधायकों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की हिम्मत जुटा पा रहा है।
विपक्षी खेमे में सेंध की आस टूटी, अपने ही घर में लगी आग
पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के हाथों करारी शिकस्त झेलने के बाद, भाजपा की पूरी रणनीति सत्तारूढ़ कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान पर टिकी हुई थी। भाजपा नेतृत्व को पूरी उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच की कथित वर्चस्व की जंग उनके लिए राज्य में वापसी के नए रास्ते खोलेगी। हालांकि, शिवकुमार के नेतृत्व में कांग्रेस के भीतर शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण ने भाजपा की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। इसके विपरीत, विधान परिषद चुनाव में खुद भाजपा के ही विधायकों द्वारा की गई क्रॉस वोटिंग ने कांग्रेस के संकट की जगह भाजपा के लिए ही एक अंतहीन और गहरे आंतरिक संकट का दरवाजा खोल दिया है।
भगवान के दर पर बैठक का विरोध और नार्को टेस्ट की मांग
क्रॉस वोटिंग की इस अप्रत्याशित घटना के बाद बागी विधायकों की पहचान करने के लिए प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने भगवान मंजूनाथ के प्रसिद्ध मंदिर में विधायक दल की एक विशेष बैठक बुलाने की रूपरेखा तैयार की थी। लेकिन, पार्टी के भीतर सक्रिय एक मजबूत विरोधी गुट के भारी विरोध और हंगामे के चलते विजयेंद्र को अपनी यह योजना बीच में ही टालनी पड़ी। इसके जवाब में विजयेंद्र खेमे के वफादार नेता एचके सुरेश ने मंजूनाथ मंदिर जाकर पूरी निष्ठा की शपथ ली और मामले की तह तक जाने के लिए सभी संदिग्ध विधायकों का नार्को टेस्ट कराने तक की बड़ी मांग रख दी। इस पूरे मामले की जांच कर रही तीन सदस्यीय केंद्रीय समिति ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट आलाकमान को सौंप दी है, लेकिन इसके बावजूद शीर्ष नेतृत्व ने अब तक दोषी विधायकों पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की है, जिससे आंतरिक असंतोष और गहरा गया है।
विजयेंद्र की कमान संभालते ही उभरी गुटबाजी, दिग्गज आमने-सामने
कर्नाटक भाजपा में सत्ता से बेदखल होने के बाद से ही विवादों का दौर शुरू हो गया था, खासकर जब संगठन की कमान बीएस येदियुरप्पा के बेटे बीवाई विजयेंद्र को सौंपी गई। इस फैसले के बाद शुरू हुई गुटबाजी के चलते पहले वरिष्ठ नेता बसनगौड़ा पाटिल यतनाल को पार्टी से निष्कासित होना पड़ा, तो वहीं पूर्व डिप्टी सीएम केएस ईश्वरप्पा ने खुद को भाजपा से पूरी तरह अलग कर लिया। अब विजयेंद्र को दोबारा संगठन की कमान सौंपे जाने की सुगबुगाहट और क्रॉस वोटिंग विवाद के बाद यह कलह पूरी तरह से सड़कों पर आ गई है। इस समय कर्नाटक भाजपा में पूर्व मुख्यमंत्री डीवी सदानंद गौड़ा, एसआर विश्वनाथ और बसवराज बोम्मई जैसे कद्दावर नेताओं के कई सक्रिय गुट काम कर रहे हैं। इनमें से सदानंद गौड़ा के नेतृत्व वाले गुट ने वर्तमान अध्यक्ष विजयेंद्र और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर अशोक को उनके पदों से हटाने के लिए बाकायदा एक खुला मोर्चा खोल दिया है।
सदानंद गौड़ा का कथित ऑडियो वायरल, अंडरवर्ल्ड से संबंधों के आरोप
इस पूरे राजनीतिक घमासान के बीच, पूर्व मुख्यमंत्री डीवी सदानंद गौड़ा का एक कथित ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस लीक हुए ऑडियो में वह वर्तमान प्रदेश नेतृत्व यानी विजयेंद्र को पद से हटाने की रणनीति पर चर्चा करते सुने जा रहे हैं। मामला यहीं शांत नहीं हुआ; एक अन्य विवाद में गौड़ा ने अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ और प्रभावशाली विधायक एसआर विश्वनाथ पर अंडरवर्ल्ड के साथ कथित संबंध होने के गंभीर आरोप मढ़ दिए हैं। इस सनसनीखेज आरोप-प्रत्यारोप ने कर्नाटक में भाजपा की छवि को भारी नुकसान पहुंचाया है और राज्य इकाई को पूरी तरह से गुटीय जंग के अखाड़े में तब्दील कर दिया है।
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