मध्यप्रदेश में उद्योग और निवेश की अपार संभावनाएं बताईं
भोपाल। वाराणसी में 31 मार्च 2026 को मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश सहयोग सम्मेलन आयोजित हुआ। इस सम्मेलन में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उत्तर प्रदेश के मंत्रियों तथा वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। यहां काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट और महाकालेश्वर मंदिर ट्रस्ट के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुए, जो दोनों राज्यों के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगा। इसके साथ ही, एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) क्षेत्र में सहयोग के लिए भी एक एमओयू हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश को औद्योगिक विकास के लिए असीमित निवेश संभावनाओं वाला राज्य बताया, जहां से 70 हजार करोड़ रुपए से अधिक का निर्यात हो रहा है। सम्मेलन के दौरान दोनों राज्यों के प्रतिनिधियों ने लघु उद्योगों से लेकर धार्मिक पर्यटन और रोजगार के अवसरों पर गहन विचार-विमर्श किया। अधिकारियों ने अपने-अपने विभागों की प्रगति और भविष्य की योजनाओं का प्रजेंटेशन दिया। इस मंच पर इस बात पर भी मंथन हुआ कि भविष्य में दोनों राज्य किन नए क्षेत्रों में एक साथ काम कर सकते हैं ताकि साझा विकास को गति मिले।
काशी विश्वनाथ धाम को दुनिया के सात पवित्र स्थलों में एक- सीएम यादव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में काशी विश्वनाथ धाम को दुनिया के सात पवित्र स्थानों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि यह सहयोग सम्मेलन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कर्मक्षेत्र में एक अद्भुत आयोजन है। डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासन में सुशासन की स्थापना और अधिकारियों द्वारा कानून-व्यवस्था व विकास की दिशा में किए गए उल्लेखनीय कार्यों की भी प्रशंसा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के कुशल नेतृत्व में देश तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के संकल्प बल पर ‘लाल सलाम’ को ‘आखिरी सलाम’ कर दिया गया है और मध्यप्रदेश भी अब नक्सल मुक्त हो चुका है। यह लोकतंत्र की स्थापना के लिए एक बड़ी चुनौती थी, जिसे पार कर लिया गया है।
साझा विरासत और विशेष संबंध
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दोनों राज्यों के बीच के विशेष रिश्ते पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि काशी की तरह उज्जैन का भी प्राचीन और सांस्कृतिक महत्व है। इन दोनों शहरों में धार्मिक पर्यटन की अपार संभावनाओं को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने विकास कार्यों की शुरुआत की है। बाबा महाकाल के महालोक बनने से मध्यप्रदेश में धार्मिक पर्यटन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने प्रभु श्रीराम के चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के किनारे बिताए महत्वपूर्ण काल और भगवान श्रीकृष्ण द्वारा कंस वध के बाद उज्जैन में शिक्षा प्राप्त करने का उल्लेख किया, जो दोनों राज्यों के गहरे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जुड़ाव को दर्शाता है। डॉ. यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश साझा विरासत के साथ मिलकर आगे बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना पर काम शुरू हुआ है, जिससे मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड और उत्तर प्रदेश के कई जिलों को सिंचाई के साथ-साथ पेयजल की सुविधा का भी लाभ मिलेगा। दोनों राज्य मुरैना में 2000 मेगावॉट के सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट पर भी मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने विश्वनाथ कॉरिडोर की व्यवस्थाओं को समझा और प्रयागराज में ऐतिहासिक महाकुंभ के आयोजन की व्यवस्थाओं का अध्ययन करने के लिए अधिकारियों को भेजा था। आगामी सिंहस्थ के आयोजन के लिए मध्यप्रदेश में हर तरह के प्रबंधन की तैयारियां चल रही हैं।
निवेश और निर्यात में मध्यप्रदेश की छलांग
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए अनंत निवेश संभावनाओं पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि प्रदेश से 70 हजार करोड़ रुपए से अधिक का निर्यात हो रहा है। राज्य में सिंचाई का रकबा बढ़कर 55 लाख हेक्टेयर हो गया है। प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 40 हो गई है। राज्य सरकार हॉस्पिटल खोलने के लिए 1 रुपए लीज पर 30 एकड़ जमीन उपलब्ध करा रही है। कृषि कल्याण वर्ष में किसानों को विभिन्न योजनाओं में 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है, जो कृषि क्षेत्र में राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
मंत्री नंदगोपाल गुप्ता ने एमपी-यूपी सम्मेलन को बताया मजबूत साझेदारी का उदाहरण
उत्तर प्रदेश के उद्योग मंत्री नंदगोपाल गुप्ता (नंदी) ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में आगमन को सुखद सौभाग्य बताया। उन्होंने डॉ. यादव को बाबा महाकाल का अनन्य भक्त, सरल स्वभाव का और जनता के मन में छाप छोड़ने वाला लोकप्रिय राजनेता बताया, जिनके प्रशासनिक निर्णय कठोर होते हैं और मध्यप्रदेश सरकार में लापरवाही बर्दाश्त नहीं है। मंत्री गुप्ता ने कहा कि यह सम्मेलन दोनों राज्यों के बीच गहरी समझ का स्पष्ट उदाहरण है। उन्होंने बघेलखंड, ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड के लोगों के साथ उत्तर प्रदेश के विशेष संबंध का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश निवेशकों के लिए सबसे बेहतर गंतव्य बन गया है। उत्तर प्रदेश सरकार का उद्देश्य युवाओं को उद्यमी बनाना है और अब तक 1 लाख 63 हजार युवाओं को 6000 करोड़ रुपए से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी है। उन्होंने ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ओडीओपी) कार्यक्रम से स्थानीय कारीगरों और हस्तशिल्प को मिली नई पहचान की भी प्रशंसा की। प्रमुख सचिव राघवेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश एक संयुक्त उद्देश्य से ‘एक जिला एक उत्पाद’ के लिए सहयोग और समन्वय के लिए एकत्रित हुए हैं। उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में ओडीओपी प्रोडक्ट चुने गए हैं। उन्होंने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि वर्ष 2017 में उत्तरप्रदेश का कुल निर्यात 88 हजार करोड़ रुपए था, जो वर्ष 2024 में बढ़कर 1 लाख 86 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। इसमें ओडीओपी का योगदान 50 प्रतिशत रहा है। उत्तर प्रदेश में 44 उत्पादों को जीआई टैग दिलवाए गए हैं, जो उनकी विशिष्टता को प्रमाणित करता है। उत्तर प्रदेश के आयुक्त उद्योग विभाग रोहित आनंद ने जानकारी दी कि उत्तर प्रदेश 96 लाख एमएसएमई यूनिट के साथ देश का सबसे बड़ा राज्य है, जिससे राज्य में पूंजी निवेश की क्रांति आई है। उन्होंने बताया कि 28 मार्च को जेवर एयरपोर्ट का शुभारंभ हुआ है, जो देश में लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगा। प्रदेश में 10 से 50 एकड़ के एमएसएमई पार्क विकसित किए जा रहे हैं, जो छोटे और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देंगे। गांव कनेक्शन के संस्थापक नीलेश मिश्रा ने मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश को ‘साझा डबल इंजन’ बताया। उन्होंने बताया कि गांव कनेक्शन ने उत्तर प्रदेश के जिलों से अपनी यात्रा शुरू की, जिसमें जिलों के ओडीओपी प्रोडक्ट्स को पहचान दिलवाई गई। मिश्रा ने मध्यप्रदेश के रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव को देशभर के लिए एक अनोखा मॉडल बताया और कहा कि गांव कनेक्शन मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश की साझी विरासत का ‘डाकिया’ बन रहा है।
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