राहुल-प्रियंका की उम्मीदवारी पर आज होगा फैसला
नई दिल्ली । लोकसभा चुनाव के दो चरणों का मतदान हो चुका है। इसी के साथ देश की कुल 190 सीटों पर वोटिंग हो चुकी है। इसके बाद कल शनिवार को कांग्रेस चुनाव समिति की बैठक होने जा रही है। बताया जा रहा है कि इसमें यूपी की अमेठी और रायबरेली सीट पर उम्मीदवारों के नाम को लेकर फैसला हो सकता है। दूसरे चरण के तुरंत बाद इस बैठक के कई मायने निकाले जा रहे हैं। कारण, राहुल गांधी की वायनाड सीट पर मतदान हो चुका है।
अमेठी और रायबरेली के लिए नामांकन 26 अप्रैल से शुरू हो चुके हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि अमेठी से राहुल गांधी और रायबरेली से प्रियंका गांधी के चुनाव लडऩे पर अब फैसला लिया जाएगा। यही कारण है कि पार्टी ने अभी तक अमेठी और रायबरेली से उम्मीदवारों के नामों का ऐलान नहीं किया है। हालांकि शनिवार शाम को हो होने वाली बैठक में क्या निर्णय लिया जाता है, ये अब देखने वाली बात होगी। जानकारी के मुताबिक कांग्रेस की राज्य चुनाव समिति ने राहुल गांधी नाम अमेठी से और प्रियंका गांधी का नाम रायबरेली से प्रस्तावित किया है। समिति ने ये प्रस्ताव चुनाव समिति को भेज दिया था। इसके बाद चुनाव समिति ने अंतिम निर्णय गांधी परिवार पर छोड़ दिया है। ऐसे में आने वाले एक दो दिनों में इन दोनों चर्चित सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर सकती है।
रायबरेली सीट से पांच बार सांसद रहीं सोनिया गांधी
निर्वाचन क्षेत्र के रूप में रायबरेली कांग्रेस का गढ़ है। ये पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का निर्वाचन क्षेत्र रहा है और 1999 से लगातार पांचवीं बार सोनिया गांधी यहां से सांसद चुनी गईं। यहां से तीन बार कांग्रेस पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है। रायबरेली लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत पांच विधान सभा क्षेत्र आते हैं। 2011 जनगणना के मुताबिक लगभग 35 लाख जनसंख्या वाले इस जिले में प्रति वर्ग किलोमीटर 739 लोग रहते हैं। रायबरेली की 67.25 फीसदी जनसंख्या साक्षर है। इनमें पुरुष 77.63 फीसदी और महिलाओं की साक्षरता दर 56.29 फीसदी है।
ईरान-इजराइल संघर्ष के चलते यात्रा प्रभावित, दुबई में फंसे उज्जैन के महाकाल पुजारी
चेक बाउंस: न डरें, न हल्के में लें; जानिए जेल का डर कितना सच और धारा 138 में क्या है सजा और कब होती है सख्ती?
भोजपुर मंदिर में नियमों को लेकर बहस, वीडियो ने बढ़ाई हलचल
शेयर बाजार में दशहत क्यों?: पश्चिम एशिया में घमासान के बाद निवेशकों के आठ लाख करोड़ डूबे, जानें पांच बड़े कारण