नशे और खराब नींद से बढ़ सकता है पेटदर्द, समय रहते रहें सतर्क
दैनिक जीवन का बढ़ता तनाव, पूरी नींद न ले पाना और नशीले पदार्थों का सेवन हमारे पाचन तंत्र को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। जब मानसिक रूप से नकारात्मक विचार हावी होते हैं, तो इसका सीधा नकारात्मक असर हमारी आंतों की कार्यप्रणाली पर पड़ता है, जिसके परिणामस्वरूप कब्ज और गंभीर पेट दर्द जैसी समस्याएं पैदा होने लगती हैं। पाचन तंत्र से जुड़ी इस आम समस्या को इरिटेबल बाउल सिंड्रोम यानी आईबीएस कहा जाता है, जिसमें मस्तिष्क के ठीक से काम न करने पर पेट की मांसपेशियां गड़बड़ा जाती हैं।
आईबीएस के प्रमुख लक्षण और परेशानियां
इस समस्या से पीड़ित व्यक्ति को पेट में तेज दर्द, ऐंठन, दस्त, कब्ज, एसिडिटी और खट्टी डकारें आने जैसी कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा पेट का ठीक से साफ न होना, बार-बार मल त्याग की इच्छा होना, जी मिचलाना और शरीर में पानी की कमी होना इसके आम लक्षण हैं। कई गंभीर मामलों में मरीजों को बुखार और कमजोरी या खून की कमी जैसी दिक्कतों से भी जूझना पड़ सकता है।
खानपान और परहेज से जुड़ी सावधानियां
पेट के इस रोग से बचे रहने के लिए आहार में पुराने चावल, लौकी, तुरई, मूंग की दाल, ज्वार, अनार और अदरक, पुदीना, धनिया जैसे मसालों का सही मात्रा में उपयोग करना फायदेमंद होता है। वहीं दूसरी ओर, राजमा, लोबिया, मक्के की रोटी, आलू, कद्दू, प्याज और बेसन से बनी भारी चीजों के सेवन से बचना चाहिए। इसके साथ ही कैफीन युक्त पेय पदार्थों, शराब और सिगरेट जैसी चीजों से दूरी बनाकर रखना बेहद जरूरी है।
उपचार, योग और आयुर्वेदिक उपाय
चिकित्सकीय रूप से इस समस्या का समाधान लक्षणों के आधार पर किया जाता है, जिसमें मानसिक संतुलन सुधारने के लिए ओमेगा-3 फैटी एसिड और मेडिटेशन की मदद ली जाती है। आयुर्वेद में इस स्थिति को ग्रहणी रोग माना गया है, जिसमें कच्चे बेल का चूर्ण और भुने हुए जीरे व पुदीने वाली छाछ पीना बहुत लाभदायक होता है। मानसिक शांति और शारीरिक राहत के लिए नियमित रूप से योग, प्राणायाम, शवासन और ब्राह्मी या अश्वगंधा जैसी जड़ी-बूटियों का प्रयोग करना इस बीमारी से निजात पाने का एक बेहतरीन साधन है।
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