वाणी का व्यक्ति के जीवन में बहुत महत्व है और यदि व्यक्ति भावावेष में आकर अपनी वाणी पर नियंत्रण नहीं रख पाए तो बने बनाये काम भी बिगड जाते हैं। इसलिए महाकवि तुलसी दास जी ने कहा है -
तुलसी मीठे बचन ते सुख उपजत चहुं ओर। 
बसीकरन इक मंत्र है परिहरू बचन कठोर।।
तुलसीदास जी कहते हैं कि मीठी वाणी बोलना एक व्यक्ति के लिए हुनर है। क्योंकि मीठे बचन वशीकरण का काम करते हैं। मीठी वाणी से आप किसी को भी अपना बना सकते हैं। इसलिए कठोर वचन छोड़कर मीठा बोलना चाहिए।
उसी प्रकार कबीर दास जी से ने भी अपने दोहे के माध्यम से मनुष्य को सचेत करते हुए लिखा है -
ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोये।
औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होए।।
अत: प्रत्येक मनुष्य को ऐसी वाणी बोलनी चाहिए जो श्रोता (सुनने वाले) के मन को आनंदित (अच्छी लगे) करे। ऐसी वाणी जो सुनने वालो को तो सुख का अनुभव कराती ही हो, साथ ही स्वयं का मन भी आनंद का अनुभव करता है। ऐसी ही मीठी वाणी के उपयोग से हम किसी भी व्यक्ति को उसके प्रति हमारे प्यार और आदर का एहसास करा सकते है।
वाणी कुंडली का दूसरे, तीसरे और आठवें भाव से सम्बन्ध रखता है। इन भावों में अशुभ ग्रह होने से वाणी दूषित हो जाती है। वैसे वाणी को सबसे ज्यादा दूषित राहु और मंगल करते हैं। इनके प्रभाव से व्यक्ति अनाप शनाप बोलता है। शनि का प्रभाव होने से अपशब्द बोलने की आदत पड़ जाती है। बुध के दूषित होने पर भी व्यक्ति अपशब्द बोलता है हालांकि ऐसी दशा में व्यक्ति अपशब्द हमेशा नहीं बोलता। 
इस प्रकार के लोगों का बुध कमजोर होता जाता है।
इसलिए याददाश्त और बुद्धि की समस्या भी निश्चित होती है।
इनको निश्चित रूप से जीवन में पतन का सामना करना पड़ता है।
ऐसे लोग जानबूझकर आफत को अपने पास बुला लेते हैं।
इस प्रकार की आदतों से कैंसे पाएं छुटकारा ?
प्रातःकाल उठकर भगवान सूर्यनारायण को अर्घ्य दें। 
उसके पश्चात गायत्री मन्त्र का जप करें।
प्रातः काल तुलसी के पत्ते जरूर खाएं।
खान पान को हमेशा शुद्ध रक्खें।
भोजन में दूध से बनी हुयी चीज़ों की मात्रा बढ़ा दें।